Admission for girls in Sainik Schools in Class 6

Admission for girls in sainik schools in class 6th providing equal opportunities and fostering the holistic development of young girls. The induction of women officers in the Regiment of Artillery in the Indian Army, the inclusion of women as fighter pilots in the Indian Air Force, and the opening of opportunities for women officers and sailors in the Navy represent a significant advancement towards gender equality in the Indian armed forces. These developments demonstrate a progressive change in the policy of allowing women to serve in combat roles. Although the current number of women in these positions may be limited, it’s important to acknowledge that change often occurs gradually. As more opportunities become available and women are encouraged to pursue careers in the armed forces, the gender disparity is likely to decrease over time.

Another significant step towards gender inclusivity is the induction of girls in military training academies, starting with Sainik Schools and Rashtriya Military Schools. The first batch of girls is already undergoing training, joining these institutions from Class 6 onwards. The selection process for girls is the same as that for boys. Additionally, Rashtriya Indian Military College (RIMC) reserves 5 seats per term for girls in Class 8th. The National Defence Academy (NDA) has also begun admitting 19 girls per term (10 for the army, 6 for the Air Force, and 3 for the Navy) after Class 12th. While the Air Force and Naval Academies have been training girls and boys together for many years, the Indian Military Academy (IMA) in Dehradun has trained men exclusively. However, starting from 2025, the first batch of lady cadets will join the IMA.

Previously, women could join the armed forces in Support Services, which are essential but generally do not involve direct engagement with enemy forces and carry a perceived lower threat to life. Later on, they were also inducted into Combat Support Arms such as Signals, Engineers, Air Defence Artillery, and Army Aviation, where the threat level is significantly higher. However, women officers were not initially inducted into the primary Combat Arms, namely Infantry, Mechanized Infantry, Armoured Corps, and Artillery, as these arms directly engage the enemy and often suffer heavy casualties. In the Navy, women officers were not posted onboard ships and submarines. The Air Force took the lead by inducting women as fighter pilots.

Women officers have fought a long legal battle and have been granted permanent commission opportunities, subject to meeting the required qualifications. They can now serve up to the mandatory pensionable service and even beyond. Previously, women were only offered Short Service Commission, limiting their service to 14 years, which left many highly qualified women with limited career options at the peak of their professional lives. Recently, women officers have assumed command of army units, and they are expected to progress to higher ranks. Although it will take time, the number of women officers is expected to increase.

Introducing girls to Sainik Schools from an early stage is a logical step towards achieving gender balance in the armed forces. This move is expected to yield positive results in terms of grooming future officers and enhancing gender equality. Sainik Schools provide rigorous training and holistic personality development to cadets, preparing them for various fields, including the armed forces. With time, it is anticipated that girls will be seen as gender-neutral and will excel in all domains.

Currently, logistical constraints limit the number of girls in Sainik Schools to 10% of the sanctioned strength. However, as infrastructure develops, more girls are expected to join these institutions. Presently, girls can only join Sainik Schools in Class 6, while boys can join in both Class 6 and Class 9. Girls can join RIMC twice a year in Class 8th, along with boys. It is likely that when the first batch of girls reaches Class 9, they will be permitted to join at that stage as well. While there may be initial adjustment challenges and failures, these are natural aspects of any evolving system. Women officers have already proven themselves since their induction into various arms and services, and it is foreseen that more girls will join Sainik Schools in the future.

Admission for girls in sainik schools:

Equal opportunities for girls:

Sainik Schools, which have been known for preparing boys for military careers, are now open to girls as well. This means that girls can also pursue their dreams of serving in the armed forces. By giving girls the opportunity to join Sainik Schools, the country recognizes their abilities and their strong desire to succeed in defense services.

Academic Excellence:

Sainik Schools focus a lot on leadership and working together as a team, which are important for success in the military or any other job. When girls join these schools, they will get the opportunity to develop their leadership skills, learn how to work well with others, and become more confident in themselves. These skills will help them do well in different jobs and in their personal lives too.

Although the initial progress may be small in quantity, it is qualitatively significant as it signifies a shift away from the age-old perception of women as the weaker gender.

Col Amardeep Singh, SM (Retd)

+91 7999356350

सैनिक स्कूलों में लड़कियों का प्रवेश : कुछ जानने योग्य बातें

भारत में लैंगिक समानता की दिशा में भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को गहरायी से शामिल करना एक महत्वपूर्ण प्रगति का परिचायकहै I हाल ही में ,भारतीय सेना में आर्टिलरी रेजिमेंट, भारतीय वायु सेना में लड़ाकू पायलटों के रूप में और नौसेना में महिला अधिकारियों और नाविकों के लिए युद्धपोतों पर तैनाती से महिलाओं की सशास्त्र बलों में भूमिका की दृष्टि से कई बदलाव किये गए हैं। ये बदलाव महिलाओं को युद्धक भूमिकाओं में सेवा करने की अनुमति देने की नीति में एक महत्वपूर्ण कदम है।यद्यपि इन पदों पर महिलाओं की वर्तमान संख्या सीमित है, पर हर परिवर्तन अक्सर धीरे-धीरे ही होता है। जैसे-जैसे अधिक अवसर उपलब्ध होंगे महिलाओं की संख्या अपने आप बढ़ेगी और समय के साथ ये असमानता भी कम हो जाएगी।

इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सैनिक स्कूलों और राष्ट्रीय सैन्य स्कूलों से शुरू होने वाली सैन्य प्रशिक्षण अकादमियों में कक्षा 6 से लड़कियों को शामिल करना है। लड़कियों का पहला बैच सैनिक स्कूलों में प्रशिक्षण ले रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज (आरआईएमसी) कक्षा 8 वीं में लड़कियों के लिए प्रति टर्म 5 सीटें आरक्षित हैं।राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) ने भी कक्षा 12 वीं के बाद प्रति टर्म 19 लड़कियों (सेना के लिए 10, वायु सेना के लिए 6 और नौसेना के लिए 3) को प्रवेश देना शुरू कर दिया है। वायु सेना और नौसेना अकादमी कई वर्षों से लड़कियों और लड़कों को एक साथ प्रशिक्षित कर रही हैं, पर देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में अभी तक सिर्फ पुरुषों को प्रशिक्षित किया है। 2025 से महिला कैडेटों का पहला बैच आईएमए में शामिल होगा।सभी संस्थानों के लिए लड़कियों के लिए चयन प्रक्रिया लड़कों के लिए समान है।

इससे पहले, महिलाएं सेना सहायता सेवाओं (सर्विसेज़) में सशस्त्र बलों में शामिल हो सकती थीं, जिनका काम अत्यंत महत्वपूर्ण है लेकिन इनको आम तौर पर शत्रु से सम्मुख नहीं होना पड़ता। इसके बाद में, उन्हें सिग्नल, इंजीनियर्स, एयर डिफेंस आर्टिलरी और आर्मी एविएशन जैसे कॉम्बैट सपोर्ट आर्म्स में शामिल किया गया, जहां जान का खतरा अधिक है।हालांकि, महिला अधिकारियों को शुरू में प्राथमिक लड़ाकू यूनिटों जैसे इन्फैंट्री, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्मर्ड कोर और आर्टिलरी में शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि ये अंग शत्रु के काफी नजदीक जा कर सम्मुख युद्ध करते हैं। नौसेना में, महिला अधिकारियों को जहाजों और पनडुब्बियों पर तैनात नहीं किया जाता था। वायु सेना ने कुछ वर्ष पूर्व महिलाओं को लड़ाकू पायलटों के रूप में शामिल करके एक नए युग की नींव रखी।

महिला अधिकारियों ने एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है और उन्हें आवश्यक योग्यता को पूरा करने के साथ स्थायी कमीशन के अवसर दिए गए हैं। वे अब अनिवार्य पेंशन योग्य सेवा और उससे भी आगे तक सेवा कर सकती हैं। इससे पहले, महिलाओं को केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी)का ही विकल्प उपलब्ध था जिसमें 14 साल की सेवा के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रावधान था। इस कारण कई योग्य महिलाओं को सेवा से वंचित रहना पड़ा।हाल ही में, महिला अधिकारियों ने सेना की इकाइयों की कमान संभाली है, और भविष्य में आगे भी उच्च रैंकों पर प्रगति करेंगी। इसमें समय लगेगा, लेकिन महिला अधिकारियों की संख्या बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

सैनिक स्कूलों में लड़कियों को शुरुआती चरण से ही शामिल करना सशस्त्र बलों में लैंगिक संतुलन हासिल करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। इस से भविष्य के अधिकारियों को तैयार करने और लैंगिक समानता बढ़ाने के मामले में अच्छा परिणाम मिलेगा। सैनिक स्कूल कैडेटों को कठोर प्रशिक्षण और समग्र व्यक्तित्व विकास प्रदान करते हैं, उन्हें सशस्त्र बलों सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लिए तैयार करते हैं। ऐसा समय दूर नहीं है जब कि इन संस्थानों में भी लड़कियों को लड़कों के समान अवसर मिलेंगे।

अभी सैनिक स्कूलों में लड़कियों की संख्या कुल स्वीकृत रिक्तियों का 10% तक है। जैसे-जैसे स्कूलों के बुनियादी ढांचे का विकास होता है, इन संस्थानों में अधिक लड़कियों के शामिल होने की उम्मीद है। वर्तमान में, लड़कियां केवल कक्षा 6 में सैनिक स्कूलों और राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूलों में शामिल हो सकती हैं, जबकि लड़के कक्षा 6 और कक्षा 9 दोनों में शामिल हो सकते हैं। लड़कियां, लड़कों के साथ ही कक्षा 8 वीं में वर्ष में दो बार आरआईएमसी में शामिल हो सकती हैं।जब लड़कियों का पहला बैच कक्षा 9 तक पहुंचता है, तो उन्हें शायद लड़कों के साथ कक्षा 9 में भी शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। आरंभिक चुनौतियां हर बदलाव का अभिन्न अंग हैं। विभिन्न सेवाओं में शामिल होने के बाद से महिला अधिकारियों ने अपनी योग्यता बखूबी साबित कर दी है, और आशा है कि भविष्य में और अधिक लड़कियां सैनिक स्कूलों में शामिल होंगी।

ये पहल छोटी है पर अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि महिलाओं को समान विकल्प प्रदान करने में एक बड़ा कदम है। समाज को इस सरकारी नीति के साथ कदम मिला कर बच्चियों को शैक्षणिक, शारीरिक एवं मानसिक रूप से आधार देने की आवश्यकता है I

कर्नल  अमरदीप  सिंह, सेना मैडल (सेवानिवृत )

+91 7999356350

Leave a Reply